Friday, May 17, 2024
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राजेंदर पाल गौतम बौध धर्म शपथ दलित शौर्य ,बदलाव या दलितों के साथ छलावा और षड्यंत्र 

पिछले दिनों राजेंदर पाल गौतम जो दिल्ली के मंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता ने बौध धर्म की दीक्षा के वक्त बाबा साहेब की २२ प्रतिज्ञाए  दोहराई .जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी और अनेक हिंदूवादी संघठनो ने इसका खूब विरोध किया जिसकी वजह से राजेंदर पाल गौतम को अपने पद से इस्तीफा देना पडा

राजेंदर पाल गौतम ने जो प्रतिज्ञाए  दोहराई  उनका एक इतिहास है , और इन प्रतिज्ञाओ को खुद भारत सरकार छापती है

राजेंदर पाल गौतम ने कहा वो किसी हिन्दू देवी देवता को भगवान नहीं मानेगा … तो इसमें क्या ख़ास बात थी जाहिर अगर कोई किसी दुसरे धर्म को अपनाता है तो उसे पिछले धर्म के या जो व्यक्ति किसी दुसरे धर्म के लोगो को ईश्वर  क्यों मानेगा  या उनमे आस्था क्यों रखेगा ??

और अगर राजेंदर पाल गौतम का इस तरह विरोध होगा तो क्या ये एक जिहाद है कि जो भी हिन्दू धर्म नहीं मानेगा उसके साथ जोर जबरदस्ती की जाएगी ??  जोर जबरदस्ती के लिए न तो इंसानियत गवाही देती है  और न ही हमारे देश का सविंधान  यानी जिसको जो मानना है है वह माने  लेकिन किसी दुसरे धर्म को गाली देने का भी अधिकार उस व्यक्ति को नहीं है ,  तो इसमें एक बात यह भी सनद  रहनी चाहिए कि राजेंदर पाल गौतम ने किसी को गाली नहीं दी है

अब इन सारी बातो को छोड़े तो यहाँ एक बात और आती है कि क्या सच में राजेंदर पाल गौतम ने इतनी बड़ी बात की है जिसके वजह से इतना हंगामा किया गया ??  क्योकि इस तरह की घटनाए  तो हर साल  होती रहती है लेकिन इस प्रकरण को बहुत ज्यादा उछला गया , जिसका एक नतीजा यह भी निकला कि राजेंदर पाल गौतम रातो रात दलित आइकॉन बन गए और पूरी दुनिया में इस बात की चर्चा  होने लगी है कि अगर  यह दौर चलता है तो बहुत जल्दी  भारत में प्राचीन काल की तरह बौध धर्म के मानने वाले  सबसे ज्यादा होंगे और यही कारण है हिन्दू वादी यानी भाजपाई इतना चिल्ला रहे है

आम आदमी पार्टी या खुद संघ का ये एक ऐसा षड्यंत्र हो जिसके जरिये कांसीराम की विरासत को चैलेंज किया गया है यानी मायावती गायब , भीम आर्मी गायब , अन्य बिकाऊ दलित नेता सब गायब और दलितों का एक नेता और वो है संघ का गुर्गा . तो इस बात को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता . लेकिन ये सच में एक अलग से आन्दोलन है तो भाजपा को निश्चय ही सुधर जाना चाहिए और जाति के नाम पर खुद रोकना चाहिए और हिन्दू धर्म को तुरंत उदार और भेदभाव से मुक्त बनाना होगा वरना इसका सबसे बड़ा खामयाजा भाजपा और संघ को ही भुगतना होगा

इसके आलावा  आम आदमी पार्टी या खुद संघ का ये एक ऐसा षड्यंत्र हो जिसके जरिये  कांसीराम की विरासत को चैलेंज किया गया है यानी मायावती गायब , भीम आर्मी गायब , अन्य बिकाऊ दलित नेता सब गायब और दलितों का एक नेता और वो है संघ का गुर्गा . तो इस बात को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता . लेकिन ये सच में एक अलग से आन्दोलन है तो भाजपा को निश्चय ही  सुधर जाना चाहिए और जाति के नाम पर खुद रोकना चाहिए और हिन्दू धर्म को तुरंत उदार और भेदभाव से मुक्त बनाना होगा वरना इसका सबसे बड़ा खामयाजा  भाजपा और संघ को ही भुगतना होगा

दलितों की पिटाई करके उनमे डर बिठा कर कम से कम आज के दौर में हिन्दू धर्म को स्थापित नहीं किया जा सकता

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